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रोज खाते हैं मैदा वाली चीजें? जानिए शरीर पर इसके असर और बचाव के आसान उपाय

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मैदा से बने खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज, कब्ज और हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकता है। जानिए विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं।

नई दिल्ली, 18 जुलाई।आधुनिक जीवनशैली में मैदा से बने खाद्य पदार्थ हमारी रोजमर्रा की थाली का हिस्सा बन चुके हैं। बिस्कुट, ब्रेड, पिज्जा, बर्गर, समोसा, पेस्ट्री और कई तरह के स्नैक्स में इस्तेमाल होने वाला मैदा स्वाद तो बढ़ाता है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसके अधिक सेवन से बचने की सलाह देते हैं। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार मैदा गेहूं का अत्यधिक रिफाइंड रूप है। इसे तैयार करने की प्रक्रिया में गेहूं का चोकर और अंकुर निकाल दिया जाता है, जिनमें फाइबर, विटामिन और कई आवश्यक खनिज मौजूद होते हैं। इन हिस्सों के हटने के बाद मुख्य रूप से स्टार्च बचता है, जो शरीर में तेजी से ग्लूकोज में बदल जाता है। यही कारण है कि मैदा से बने खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक माना जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कभी-कभार सीमित मात्रा में मैदा का सेवन गंभीर समस्या नहीं बनता, लेकिन यदि इसे रोजाना और अधिक मात्रा में खाया जाए तो यह मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और पाचन संबंधी परेशानियों का जोखिम बढ़ा सकता है। मैदा में फाइबर की मात्रा बेहद कम होने के कारण पेट देर तक भरा नहीं रहता और बार-बार भूख लग सकती है। इससे अधिक कैलोरी का सेवन होने लगता है, जो वजन बढ़ने का कारण बनता है। कई लोगों को नियमित रूप से मैदा वाली चीजें खाने पर कब्ज, पेट फूलना और अपच जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मैदा से बनी अधिकांश चीजों में चीनी, नमक और अस्वास्थ्यकर वसा भी अधिक होती है, जिससे लंबे समय में ब्लड शुगर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। जिन लोगों को पहले से मधुमेह की समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार बेहतर स्वास्थ्य के लिए मैदा की जगह साबुत गेहूं का आटा, मल्टीग्रेन आटा, जई (ओट्स), ज्वार, बाजरा और अन्य मोटे अनाज को भोजन में शामिल करना चाहिए। इन खाद्य पदार्थों में फाइबर और पोषक तत्व अधिक होते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने, ब्लड शुगर नियंत्रित रखने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करते हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त पानी का सेवन भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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बदलती जीवनशैली में स्वाद के साथ-साथ पोषण पर ध्यान देना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रोसेस्ड फूड की जगह प्राकृतिक और साबुत अनाज आधारित भोजन को प्राथमिकता दी जाए तो कई जीवनशैली संबंधी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि लंबे समय तक स्वस्थ रहने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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